Sunday, 9 September 2018

बाज़ीगर ने खेल दिखाया

बाज़ीगर ने खेल दिखाया
सबका मन बहलाया

डमरू बजा बजाकर उसने
पहले भीड़ जुटाई
गुड्डा कभी दिखाकर गुड़िया
बातें खूब बनाई
करतब दिखलाने से पहले
सबको खूब रिझाया

रुपया एक लिया हाथों में
फौरन दो कर डाले
दो के चार बनाए उसने
फिर अनगिनत उछाले
रुपये इतने देखे जब, तब
अपना मन ललचाया

खाली बर्तन लिया हाथ में
उलटा कर दिखलाया
फिर जाने क्या मंतर मारा
जल उसमें जल छलकाया
छींटे मार भिगोया सबको
ऐसी उसकी माया

-रमेश कौशिक
 (1930-)

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