Saturday, 8 September 2018

बाबा जी की छींक

घर भर को चौंकाने वाली
बाबा जी की छींक निराली

लगता यहीं कहीं बम फूटा
या कि तोप से गोला छूटा
या छूटी बन्दूक दुनाली
बाबा जी की छींक निराली

सोया बच्चा जगा चौंक कर
झबरा कुत्ता भगा भौंक कर
झन्ना उठी काँस की थाली
बाबा जी की छींक निराली

दिन में दिल दहलाने वाली
गहरी नींद हटाने वाली
बाबा जी की छींक निराली

कभी कभी तो हम डर जाते
भग कर बिस्तर में छिप जाते
हँस कर कभी बजाते ताली
बाबा जी की छींक निराली

-रमापति शुक्ल
(1909 )

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