Saturday, 8 September 2018

निम्मी का परिवार

निम्मी का परिवार निराला
कभी न होता गड़बड़ झाला
सबका अपना काम बँटा है
कूड़ा करकट अलग छँटा है

झाड़ू देती गिल्लो मिल्लो
चूल्हा चौका करती बिल्लो
टीपू टामी देते पहरा
नहीं एक भी अंधा बहरा

चंचल चुहिया चाय बनाती
चिड़िया नल से पानी लाती
निम्मी जब रेडियो बजाती
मैना मीठे बोल सुनाती

-कन्हैया लाल ‘मत्त’
(1911-2003 )

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