छू काली कलकत्ते वाली
तेरा वचन न जाए खाली
मैं हूँ जादूगर अलबेला
असली भानमती का चेला
सीधा बंगाले से आया
जहाँ-जहाँ जादू दिखलाया
सबसे नामवरी है पाई
उंगली दाँतों तले दबाई
जिसने देखा, खेल निराला
जम कर खूब बजाई ताली
चाहूँ तिल का ताड़ बना दूँ
रुपयों का अंबार लगा दूँ
अगर कहो तो आसमान पर
तुमको धरती से पहुँचा दूँ
ऐसे-ऐसे मंतर जानूं
दुख संकट छू मंतर कर दूँ
बने कबूतर, बकरी काली
-चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक
(1925-2000)
तेरा वचन न जाए खाली
मैं हूँ जादूगर अलबेला
असली भानमती का चेला
सीधा बंगाले से आया
जहाँ-जहाँ जादू दिखलाया
सबसे नामवरी है पाई
उंगली दाँतों तले दबाई
जिसने देखा, खेल निराला
जम कर खूब बजाई ताली
चाहूँ तिल का ताड़ बना दूँ
रुपयों का अंबार लगा दूँ
अगर कहो तो आसमान पर
तुमको धरती से पहुँचा दूँ
ऐसे-ऐसे मंतर जानूं
दुख संकट छू मंतर कर दूँ
बने कबूतर, बकरी काली
-चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक
(1925-2000)
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