Sunday, 9 September 2018

कंतक थैयां

कंतक थैयां
घुनूँ मनइयाँ
चंदा भागा पइयां पइयां

यह चन्दा हलवाहा है
नीले नीले खेत में
बिल्कुल सेंत मेंत में
रत्नों भरे खेत में
किधर भागता लइयां पइयां
कंतक थैयां घुनूं मनैयां........

अंधकार है घेरता
टेढ़ी आँखें हेरता
चांद नहीं मुँह फेरता
राकेट को है टेरता
मुन्नू को लूँगा मैं दइयाँ
कंतक थैयां घुनूं मनैयां........

मिट्टी के महलों के राजा
ताली तेरी बढ़िया बाजा
छोटा छोटा छोकरा
सिर पर रखे टोकरा
राम बनाये डोकरा
बने डोकरा करूँ बलैयां
कंतक थैयां घुनूं मनैयां......

-राष्ट्र बंधु (डा०)

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